तलाश में  हूँ,

एक आकार की तलाश में हूँ,

निखार दू जिसको,

उस पत्थर  की तलाश में हूँ,

उड़ आया  हूँ में,

कल्पनाओ की उड़ान से,

मोम को पिघलाए,

उस अगन  की तलाश में हूँ,

हर रास्ते ले जाते हैं,

लाचार चेहरो  के बीच,

थोड़ी सी मुस्कान दे,

उस मोड़ की तलाश में हूँ,

अपने आप से टकराते,

सफ़ेद पड़ चुके हैं,

लहू को रंग  लाल दे,

रक्त-कनो की तलाश में हूँ,

वैचारिक परिपक्वता  गर जो,

माध्यम होता उन्नति का,

धडकन को धक्का  लगाये,

उस हादसे की तलाश में हूँ,

मैं तो मोहब्बत  हूँ,

अगर अंदर जाख पाए तू,

तेरी आँखें  विस्मित करें,

उस “आशिक” की तलाश में हूँ.

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